अरविन्द तिवारी की रिपोर्ट
जगन्नाथपुरी -- पुरुषोत्तम क्षेत्र पुरी में सन्निहित महोदधि को भगवत्पाद श्रीशिवावतार शंकराचार्य महाभाग ने पूर्वाम्नाय श्रीगोवर्द्धनमठ पुरी पीठ का मान्य तीर्थ उद्घोषित किया है । उनके द्वारा उद्भासित दशनामी सन्यासियों में सागरनामा सन्यासियों को सागर और उसके तटवर्ती क्षेत्र को सुरक्षित तथा सुसंस्कृत रखने का दायित्व प्राप्त है। सिन्धु श्रीमन्नारायण का निवासस्थान है। जल जीवों का जीवन है। उक्त हेतुओं से विगत चौदह वर्षों से पूर्वाम्नाय श्रीगोवर्द्धनमठ पुरी पीठ की ओर से नित्य सायंकाल पुरी में स्वर्गद्वार के सम्मुख महोदधि आरती का कार्यक्रम आस्था और आह्लादपूर्वक विधिवत् सम्पन्न हो रहा है। पौष पूर्णिमा को राष्ट्रोत्कर्ष और विश्वकल्याण की भावना से महोदधि आरती का वार्षिक महोत्सव श्रीगोवर्द्धनमठ पुरी के श्रीमज्जगद्गुरू शंकराचार्य पूज्यपाद स्वामी श्रीनिश्चलानन्द सरस्वती जी महाराज के सानिध्य में सम्पन्न हुआ । इस अवसर पर उपस्थित उड़ीसा के महामहिम राज्यपाल महोदय ने अपने उद्बोधन में कहा कि समुद्र में जल है, जल में कण हैं तथा जल कण हमारे स्वरूप को व्यक्त करते हैं, भगवत्स्वरूप भी हैं। पुरी शंकराचार्य महाभाग ने इस अवसर पर अपने संदेश में कहा कि महोदधि की महत्ता आधुनिक विज्ञान भी स्वीकारता है, महोदधि का जल वर्षा के स्त्रोत है । जल में ज शब्द का तात्पर्य जन्मस्थान तथा ल का तात्पर्य लयस्थान है। सनातन सिद्धांत जोकि इस राकेट, एटम, कम्प्यूटर और मोबाइल के युग में भी दार्शनिक, वैज्ञानिक और व्यावहारिक धरातल पर प्रासंगिक एवं सर्वोत्कृष्ट है वह विज्ञान को भी मार्गदर्शन देने में सक्षम है। विज्ञान के अनुसार पदार्थ ऊर्जा का रूप है, हमारा वेदादि शास्त्रसम्मत सिद्धांत इसके आगे की बात कहता है कि आत्मा ऊर्जा का रूप है तथा ऊर्जा का परम स्त्रोत है। पुरी शंकराचार्य जी ने वेदादि शास्त्रसम्मत राजनीति की परिभाषा को उद्घृत करते हुये कहा कि सुशिक्षित , सुसंस्कृत , सुरक्षित , सम्पन्न , सेवा परायण , स्वस्थ एवं सर्वहितप्रद व्यक्ति तथा समाज की संरचना ही विश्व स्तर पर राजनीति की परिभाषा मान्य होनी चाहिये। हमारे मठ , मन्दिर शिक्षा , संस्कृति , रक्षा , सेवा , धर्म और मोक्ष के केन्द्र हैं, हम ऐसे भव्य भारत की कल्पना करते हैं जहाँ पर शुचिता, स्वच्छता, सुन्दरता, शील और स्नेह का सभी ओर दर्शन हो। महादधि आरती के इस वार्षिक महोत्सव में उड़ीसा के राज्यपाल , संतवृन्द , पीठपरिषद , आदित्य वाहिनी -,आनन्द वाहिनी , राष्ट्रोत्कर्ष अभियान , हिन्दू राष्ट्र संघ के सदस्य तथा जनसमुदाय उपस्थित थे।

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